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Sunil Kumar Vishwakarma / Mon, Oct 5, 2026 / Post views : 372
सिंगरौली आरटीओ की मनमानी और भ्रष्टाचार: जपती किसी और कारण से, और जुर्माना किसी और चीज़ का!
मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में परिवहन विभाग (RTO) की कार्यप्रणाली और घोर लापरवाही का एक बेहद शर्मनाक और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यह मामला आम जनता और वाहन चालकों का आर्थिक शोषण करने वाले उस भ्रष्ट सिस्टम की पोल खोलता है, जहाँ नियम-कानून को ताक पर रखकर मनमाने तरीके से वसूली की जा रही है।
मामला क्या है? (दस्तावेजों के आधार पर सच):
पहली कार्रवाई (वाहन जपती):
दिनांक 19/09/2026 को परिवहन विभाग द्वारा वाहन (संख्या: MP-66-........) को इस आधार पर जब्त किया गया था कि मौके पर कागजात और परमिट नहीं पाया गया था। इसके लिए मोटर यान अधिनियम की धारा 207 तथा मध्य प्रदेश करधान अधिनियम की धारा 16/3 के तहत वाहन को .... थाने में सुरक्षित रखा गया था।
दूसरी कार्रवाई (भारी जुर्माना और धाराओं में बदलाव):
लेकिन जब दिनांक 23/09/2026 को मेमो रसीद (Memo Receipt) जारी की गई, तो पूरा खेल ही बदल गया। वाहन मालिक के नाम पर अचानक ₹60,000 (साठ हजार रुपये) का भारी-भरकम जुर्माना ठोंक दिया गया। इसमें ऐसी-ऐसी धाराओं और अपराधों (Offences) का जिक्र कर दिया गया, जिनका शुरुआती जपती पत्रक में दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं था।
सवाल यह उठता है कि यह कैसा खेल है?
जपती का कारण अलग, जुर्माना अलग क्यों? जब गाड़ी को केवल कागजात या परमिट न होने के नाम पर जब्त किया गया था, तो अलग-अलग और गंभीर धाराओं के तहत 60,000 रुपये का भारी जुर्माना कैसे वसूला जा रहा है?
आरटीओ की संदेहास्पद कार्यप्रणाली: क्या परिवहन विभाग के भीतर भ्रष्टाचार का यह ऐसा खेल चल रहा है, जहाँ आम लोगों को डरा-धमकाकर और कानून की गलत व्याख्या करके मनमाने पैसे ऐंठे जा रहे हैं?
यह सिर्फ एक वाहन की कहानी नहीं है, बल्कि सिंगरौली आरटीओ के उस भ्रष्ट तंत्र का सच है जो रोज़ाना आम जनता को परेशान कर रहा है। इस मामले की उच्च स्तरीय जाँच होनी चाहिए और इस मनमानी पर तुरंत रोक लगनी चाहिए, ताकि निर्दोष वाहन चालकों का शोषण होना बंद हो सके।
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