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Sunil Kumar Vishwakarma / Fri, Oct 23, 2026 / Post views : 170
जनविश्वास या सवालों पर पहरा..?
पत्रकार के साथ कथित घटनाक्रम पर उठे गंभीर सवाल!
सिंगरौली (मध्य प्रदेश):
लोकतंत्र में पत्रकार का काम सिर्फ खबरें दिखाना ही नहीं, बल्कि सत्ता और प्रशासन से सवाल पूछना भी है। सिंगरौली में पत्रकार अनिल शाह के साथ कथित तौर पर मोबाइल फोन छीने जाने और उन्हें बरगवां थाने में बैठाए जाने के आरोप सामने आने के बाद से हड़कंप मचा हुआ है।
बताया जा रहा है कि पत्रकार अनिल शाह ने अडानी कंपनी की उज्जैनी भूमिगत खदान से जुड़े संवेदनशील मुद्दे पर रीवा संभाग के कमिश्नर से सवाल पूछा था। (हालांकि, मामले की आधिकारिक पुष्टि और संबंधित पक्ष का पक्ष आना अभी बाकी है।)
⚖️ पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर बड़ा सवाल
यह मामला केवल एक पत्रकार का नहीं, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता और सवाल पूछने के मौलिक अधिकार से जुड़ा है। यदि आज एक पत्रकार के साथ ऐसी घटना के आरोप सामने आते हैं और पत्रकार बिरादरी खामोश रहती है, तो कल यह स्थिति किसी भी अन्य पत्रकार के सामने आ सकती है।
🤝 पत्रकारों की एकजुटता समय की मांग
समय की मांग है कि सिंगरौली ही नहीं, बल्कि पूरे रीवा संभाग के पत्रकार एकजुट होकर इस मामले की निष्पक्ष जांच और सच्चाई सामने लाने की पुरजोर मांग करें। एकजुटता का अर्थ किसी निष्कर्ष पर तुरंत पहुँचना नहीं, बल्कि पत्रकार अधिकारों की रक्षा और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना है।
🏛️ प्रशासन से पारदर्शिता की उम्मीद
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के 'जनविश्वास अभियान' का मुख्य उद्देश्य जनता का भरोसा जीतना है। ऐसे में सिंगरौली प्रशासन को भी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए कि आखिर पूरा घटनाक्रम क्या था और सच्चाई क्या है?
"पत्रकारिता की ताकत उसकी कलम है, लेकिन उस कलम की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए पत्रकारों का एक होना भी उतना ही जरूरी है। आज सवाल अनिल शाह का है, कल किसी और का हो सकताहै। आवाज उठाइए, निष्पक्ष जांच की मांग कीजिए!"
मध्य विज़न दर्पण (Madhya Vision Darpan)
सत्य, निष्पक्ष और बेबाक आवाज
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