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अभिनेता नाना पाटेकर का निधन, विदाई के लिए वर्षों पहले जुटा रखी थी 12 मन लकड़ी
विशेष संवाददाता / ब्यूरो रिपोर्ट
मुंबई/पुणे:
भारतीय सिनेमा जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अपनी बेजोड़ अदाकारी, दमदार आवाज और जमीन से जुड़े स्वभाव के लिए पहचाने जाने वाले दिग्गज अभिनेता और फिल्मकार नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह निधन हो गया। वह 75 वर्ष के थे। उनके निधन से पूरे देश और फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है।
अपने अभिनय के अलावा अपनी बेबाक और फक्कड़ शैली के लिए मशहूर नाना पाटेकर का जीवन हमेशा से ही अनूठा रहा है। उनके निधन के बाद उनका एक पुराना और चर्चित किस्सा फिर से चर्चा में आ गया है, जिसमें उन्होंने अपनी मौत और अंतिम संस्कार की तैयारी पहले ही पूरी कर लेने का जिक्र किया था।
सालों पहले कर रखी थी अंतिम संस्कार की व्यवस्था
कुछ समय पहले एक साक्षात्कार के दौरान नाना पाटेकर ने बड़े ही बेबाक अंदाज में यह खुलासा किया था कि उन्होंने अपनी अंतिम विदाई के लिए 12 मन लकड़ी (लगभग 400 से 480 किलो) पहले से ही सुरक्षित रखवा रखी है। उनका मानना था कि जीवन का अंतिम सत्य मृत्यु है, जिससे मुंह नहीं मोड़ा जा सकता।
इस दौरान उनका मजाकिया और हास्य-विनोद से भरा अंदाज भी देखने को मिला था। उन्होंने चुटीले अंदाज में कहा था— "मेरे अंतिम संस्कार में गीली लकड़ी का इस्तेमाल बिल्कुल मत करना, सूखी लकड़ी ही जलाना। वरना गीली लकड़ी के धुएँ से लोगों की आँखों में आँसू आ जाएंगे और दुनिया को यह गलतफहमी होगी कि वे मेरे जाने पर रो रहे हैं।"
सादगी और बेबाकी की मिसाल थे नाना
नाना पाटेकर ने अपने चार दशक से अधिक लंबे करियर में 'क्रांतिवीर', 'तिरंगा', 'पर परिंदा', 'अग्निसाक्षी' और 'वेलकम' जैसी अनगिनत बेहतरीन फिल्मों में काम किया। फिल्मों से इतर सामाजिक सरोकारों, किसानों की मदद और आपदा के समय हमेशा आगे रहने वाले नाना पाटेकर का यूं अचानक चले जाना कला जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
उनकी अंतिम विदाई और राजकीय सम्मान के साथ होने वाले अंतिम संस्कार की तैयारियां उनके पुणे स्थित आवास के नजदीक की जा रही हैं। उनके जाने से भारतीय सिनेमा के एक बेबाक युग का अंत हो गया है।
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